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Parenting Tips: बच्चा बात नहीं मानता तो चिल्लाने के बजाय अपनाएं ये 5 तरीके, पेरेंटिंग होगी आसान

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | बच्चा बात नहीं मानता तो चिल्लाने के बजाय उसे समझने, स्पष्ट निर्देश देने, अच्छे व्यवहार की तारीफ करने और धैर्य रखने के तरीके जानें।

बच्चों का बार-बार मना करने के बावजूद अपनी जिद पर अड़े रहना, खिलौने नहीं समेटना या माता-पिता की बात अनसुनी करना घरों में आम चुनौती है। ऐसी परिस्थितियों में कई बार माता-पिता अपना धैर्य खो देते हैं और बच्चे को डांटने लगते हैं। हालांकि, डर के कारण बच्चा कुछ देर के लिए बात मान सकता है, लेकिन इससे वह अपनी गलती समझ गया है, यह जरूरी नहीं है।


बच्चों के व्यवहार को बेहतर ढंग से संभालने के लिए माता-पिता का शांत रहना, उनकी बात समझना और नियमों को सरल तरीके से बताना मददगार हो सकता है। पेरेंटिंग एक्सपर्ट मनीषा के बताए सुझावों के आधार पर जानिए, बच्चे को बिना बार-बार डांटे अपनी बात कैसे समझाई जा सकती है।


1. पहले जानें कि बच्चा बात क्यों नहीं सुन रहा


हर बार बच्चे के निर्देश न मानने को जानबूझकर की गई शरारत नहीं समझना चाहिए। संभव है कि वह खेल में इतना व्यस्त हो कि तुरंत ध्यान न दे पाए या उसे काम बदलने के लिए थोड़ा समय चाहिए।


उदाहरण के लिए, खेलने के बीच अचानक खिलौने समेटने को कहने के बजाय उसे पहले से बता दें कि पांच मिनट बाद खेलने का समय खत्म हो जाएगा। इससे बच्चे को गतिविधि रोकने के लिए मानसिक रूप से तैयार होने में मदद मिल सकती है।


2. गुस्से में चिल्लाने के बजाय शांत आवाज में समझाएं


बच्चे की गलती पर नाराज होना स्वाभाविक है, लेकिन हर बार तेज आवाज में डांटना जरूरी नहीं है। ऐसी स्थिति में कुछ पल रुककर खुद को शांत करें और फिर बच्चे को बताएं कि उसका कौन-सा व्यवहार ठीक नहीं था।


मिसाल के तौर पर, यदि बच्चा सामान फेंक रहा है तो उसे अपमानित करने के बजाय समझाएं कि सामान फेंकने से किसी को चोट लग सकती है या चीजें टूट सकती हैं। इससे बच्चे को केवल मनाही सुनने के बजाय नियम के पीछे का कारण समझने का अवसर मिलता है।


3. अच्छे व्यवहार की खुलकर तारीफ करें


बच्चा जब अपने खिलौने खुद समेटे, सामान सही जगह रखे या बिना बहस किए कोई जरूरी काम पूरा करे, तो उसके प्रयास की तारीफ करें।


आप कह सकते हैं, 'आज तुमने अपने खिलौने खुद समेटे, मुझे बहुत अच्छा लगा।' इस तरह की सच्ची और स्पष्ट प्रशंसा बच्चे को यह समझने में मदद करती है कि कौन-सा व्यवहार अच्छा है और उसे दोहराना क्यों उपयोगी है।


4. एक बार में एक ही स्पष्ट निर्देश दें


छोटे बच्चों को एक साथ कई काम बताने पर वे उलझ सकते हैं। इसलिए लंबे निर्देशों की जगह छोटी और साफ बात कहें।


जैसे, 'पहले अपने खिलौने डिब्बे में रख दो।' काम पूरा होने के बाद अगला निर्देश दें। बच्चे की उम्र और समझ के अनुरूप बात करना निर्देशों का पालन करना आसान बना सकता है।


5. आदतों में बदलाव के लिए समय दें


बच्चों का व्यवहार रातोंरात नहीं बदलता। यदि बच्चा एक दिन आपकी बात मानता है और अगले दिन फिर वही गलती करता है, तो इसे अपनी असफलता न समझें।


घर के जरूरी नियम तय रखें, उन्हें लगातार और शांत तरीके से समझाएं तथा खुद भी उनका पालन करें। माता-पिता का व्यवहार बच्चों के लिए सीखने का महत्वपूर्ण उदाहरण होता है। नियमित अभ्यास और धैर्य से अच्छी आदतें विकसित करने में मदद मिल सकती है।


कब विशेषज्ञ की मदद लेनी चाहिए?


यदि बच्चे का गुस्सा लगातार बहुत अधिक रहता है, उसे उम्र के अनुरूप निर्देश समझने में बार-बार कठिनाई होती है या उसका व्यवहार घर, स्कूल और रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित कर रहा है, तो बाल रोग विशेषज्ञ या बाल मनोवैज्ञानिक से सलाह लेना उचित होगा।


बच्चों की परवरिश का उद्देश्य केवल उनसे अपनी बात मनवाना नहीं, बल्कि उन्हें भावनाएं संभालना, नियम समझना और जिम्मेदारी सीखने में मदद करना भी है। प्यार के साथ स्पष्ट सीमाएं और धैर्यपूर्ण व्यवहार इस प्रक्रिया को बेहतर बना सकते हैं।

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